Saturday 25 May 2024 9:58 PM
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आज दिनांक 21 अगस्त 2023 को शिल्प संगीत नृत्य महाविद्यालय कलाकेंद्र का स्थापना दिवस कला केंद्र भागलपुर में मनाया गया

आज दिनांक 21 अगस्त 2023 को शिल्प संगीत नृत्य महाविद्यालय कलाकेंद्र का स्थापना दिवस कला केंद्र भागलपुर में मनाया गया। कला केंद्र के प्राचार्य राजीव कुमार सिंह ने स्वागत करते हुए बताया कि यह कला केंद्र का यह 69वां स्थापना दिवस है। भारतीय कला संस्कृति के उत्थान व प्रसार हेतु पुनर्जागरण काल के कलाकारों ने पूरे देश में कई कल संस्थाओं की स्थापना की. इसी भावना से प्रेरित होकर कला मर्मज्ञ बंकिम चंद्र बनर्जी ने भागलपुर में 1954 ईस्वी को कला केंद्र की स्थापना की थी।

आज दिनांक 21 अगस्त 2023 को शिल्प संगीत नृत्य महाविद्यालय कलाकेंद्र का स्थापना दिवस कला केंद्र भागलपुर में मनाया गया। कला केंद्र के प्राचार्य राजीव कुमार सिंह ने स्वागत करते हुए बताया कि यह कला केंद्र का यह 69वां स्थापना दिवस है। भारतीय कला संस्कृति के उत्थान व प्रसार हेतु पुनर्जागरण काल के कलाकारों ने पूरे देश में कई कल संस्थाओं की स्थापना की. इसी भावना से प्रेरित होकर कला मर्मज्ञ बंकिम चंद्र बनर्जी ने भागलपुर में 1954 ईस्वी को कला केंद्र की स्थापना की थी। कार्यक्रम की शुरुआत समाजकर्मी रामशरण, प्रकाश चंद्र गुप्ता, उदय, तक़ी अहमद जावेद, मो सहबाज, नीना एस प्रसाद, जावेद अख्तर,बिजय कुमार साह, महबूब आलम आदि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। संगीत के कार्यक्रम की शुरुआत विनय कुमार भारती ने राग यमन से की। इसके बाद दुष्यंत कुमार की रचना “हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए” समूह गीत की प्रस्तुति कला केंद्र संगीत के छात्रों ने की। प्रजीत विनायक ने लोकगीत “मोरे बगिया में आई बहार कोयलिया बोल रे बोल” प्रस्तुत किया । इस अवसर पर नृत्य खंड में नीना एस प्रसाद के निर्देशन में तैयार भरतनाट्यम नृत्य की प्रस्तुति रीया शरण, शानवी सिंह, नव्या सोनी ने की।
वहीं एक तरफ चित्र शिल्प प्रदर्शनी लगी थी। जल रंग और एक्रेलिक रंगो द्वारा तैयार खूबसूरत चित्रों की प्रदर्शनी मैं प्राकृतिक चित्रण, व्यक्ति चित्र कंपोजिशन और भागलपुर की लोक चित्रकला मंजूषा चित्रकला का खंड दर्शकों को आकर्षित कर रहा था। कला केंद्र के कला शिक्षक उमेश प्रसाद के हॉल ओं प्रोसेस द्वारा निर्मित अंबेडकर, गौतम बुद्ध एवं पोट्रेट दूर से ही लोगों को आकर्षित कर रहे थे विक्रम कुमार द्वारा निर्मित एब्स्ट्रेक्ट टेराकोटा सिर्फ दर्शकों को रोककर सोचने के लिए मजबूर कर रहा था। मृदुल सिंह द्वारा निर्मित डिजाइन और टेंपो पेंटिंग दर्शकों को सुकून की अनुभूति हो रही थी। चित्र प्रदर्शनी में ज्योति सिंह के पेंसिल पोट्रेट की खूबसूरती को देखकर दर्शक वाह किए बिना नहीं रह पा रहे थे। चित्र शिल्प प्रदर्शनी में वरिष्ठ चिकित्सक और चित्रकार डॉ पी वी मिश्रा के जल रंगों द्वारा निर्मित सरस्वती, राम और हनुमान का प्रेम, रोटी बेलती औरत ने लोगों को बहुत प्रभावित किया। कृषि प्रदर्शनी में मिथिलेश आनंद, शशांक, अभिषेक, नंदनी, निकिता, संतोष, कृषिका, वेदांत आदि के द पेंटिंग प्रदर्शनी में अपनी पहचान बना रहे थे। इस अवसर पर चित्रकार शैलेंद्र, जयकुमार, चित्रकार माधव, शारदा श्रीवास्तव, पूनम श्रीवास्तव, डॉ श्रीकांत प्रसाद मंडल, संजय कुमार, दीपक मंडल, रविंद्र कुमार सिंह, ललन, संजय कुमार, रजनी कुमारी शोभा देवी, मंजू कुमारी रूबी सिंह, वंदना भारद्वाज आदि मौजूद थीं।

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