Wednesday 22 May 2024 1:51 PM
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बिहार/ब्रेकिंग न्यूज

कहलगांव के राधाकृष्ण ठाकुरवाड़ी में पंच दिवसीय झूलन प्रारंभ।

कहलगांव के राधाकृष्ण ठाकुरवाड़ी में पंच दिवसीय झूलन प्रारंभ।

कहलगांव के राधाकृष्ण ठाकुरवाड़ी में पंच दिवसीय झूलन प्रारंभ।

कहलगांव से शैलेन्द्र कुमार गुप्ता

शहर के चौधरी टोला स्थित प्राचीन राधाकृष्ण ठाकुरवाड़ी में आज से पांच दिवसीय झूलन का कार्यक्रम प्रारंभ हो गया है। यह कार्यक्रम आगामी 31 अगस्त तक चलेगा। मन्दिर के प्रबंधक सह सेवायत पण्डित बाल कृष्ण पांडेय ने बताया की आज विधिवत पूजा भोग के उपरांत भगवान राधाकृष्ण जी को झूला में बैठाया गया। इस अवसर पर भजन कीर्तन का भी आयोजन किया गया जिसमे चंदननाथ चौधरी अर्पित झा रंजन झा शास्वत कुमार आदि ने अपने भजन से प्रभु को रिझाया, कहलगांव शहर मे स्थित राधाकृष्ण ठाकुरबारी के सेवायत पूजारी श्री बालकृष्ण पांडे ने बताया की
झूलन यात्रा भगवान श्री कृष्ण के अनुयायियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है जो श्रावण के महीने में मनाया जाता है। यह त्योहार जुलाई-अगस्त की अवधि में आता है। यह वैष्णवों हिंदू धर्म का सबसे बड़ा और सबसे लोकप्रिय धार्मिक अवसर है। सजे-धजे झूलों, गीत और नृत्य के शानदार प्रदर्शन के लिए जाना जाने वाला, झूलन भारत में बारिश के मौसम में उत्साह के साथ मिलकर राधा कृष्ण के प्यार का जश्न मनाने वाला एक आनंदमय त्योहार है। समाजसेवी एवं विधिक सेवा प्राधिकार कहलगांव के मनीष पांडे ने बताया ने बताया की यह उत्सव का मुख्य स्थान: भारत के सभी स्थानों में से मथुरा, वृंदावन, पुरी, मायापुर झूलन यात्रा समारोह के लिए सबसे प्रसिद्ध हैं। झूलन यात्रा श्रावण (अगस्त) के महीने में, शुक्ल पक्ष (एकादशी) के ग्यारहवें दिन से लेकर पूर्णिमा के दिन (पूर्णिमा) तक मनाई जाती है, जिसे श्रावण पूर्णिमा कहा जाता है। जो आमतौर पर रक्षाबंधन त्योहार के साथ मेल खाता है। हजारों कृष्ण भक्त दुनिया भर से पवित्र शहर मथुरा, वृंदावन, ओडिशा के पुरी और पश्चिम बंगाल के मायापुर में आते हैं। राधा और कृष्ण की मूर्तियों को वेदी से निकालकर भारी अलंकृत झूलों पर रखा जाता है,
इसी उपलक्ष्य में कहलगांव के इस राधाकृष्ण ठाकुर बारी में फूलों एवं अन्य सामग्रियों से श्री कृष्ण जी का झूलन उत्सव की तैयारी प्रारंभ कर दी गई है। सभी भक्तजन झूला झुलाते हैं और भगवान के प्रेम में विभोर हो जाते हैं। देखा जाए तो वृंदावन का श्री रूप-सनातन गौड़िया मठ, बांके बिहारी मंदिर और राधा-रमण मंदिर, मथुरा का द्वारकाधीश मंदिर, जगन्नाथ पुरी का गौड़िया मठ, इस्कॉन मंदिर, गोवर्धन पीठ, श्री राधाकांत मठ, श्री जगन्नाथ बल्लव मठ और मायापुर का इस्कॉन मंदिर कुछ प्रमुख हैं। जहां यह त्योहार उनकी सबसे बड़ी भव्यता के साथ मनाया जाता है। आज इस अवसर पर कहलगांव के राधाकृष्ण ठाकुरबारी में श्री पवन कुमार खेतान, मुक्तेश्वर साह, संदीप उर्फ लल्लू रूंगटा, मनोज संथालिया, कन्हैया खंडेलवाल, मुरारी खेतान, टिवरेवाल, मनीष पांडेय, अभीषेक मिश्रा, अविकाश कुमार और मनोज पाण्डेय सहित अनेक भक्तगण उपस्थित थे। मन्दिर के प्रबन्धक श्री बालकृष्ण पांडेय ने बताया की आधुनिकता के इस दौर में प्रायः झूलन तो अब खत्म ही हो गया है। कहलगांव के इक्का दुक्का मन्दिर को छोड़कर अब तो झूलन सजता भी नही है। यही एकमात्र मन्दिर है जो वर्षों से अब तक निरंतर प्रभु सेवा में यह अयोजन करता आ रहा हैं।

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