Saturday 25 May 2024 11:05 PM
Aman Patrika
बिहार/ब्रेकिंग न्यूज

कहलगांव के ब्राह्मण समाज संघ ने शहर स्थित एक भवन में ब्राह्मण बंधूओ की एक बैठक आयोजित की गई,

कहलगांव के ब्राह्मण समाज संघ ने शहर स्थित एक भवन में ब्राह्मण बंधूओ की एक बैठक आयोजित की गई,

ब्राह्मण समाज संघ ने बैठक में लिए महत्वपूर्ण निर्णय

 

कहलगांव के ब्राह्मण समाज संघ ने शहर स्थित एक भवन में ब्राह्मण बंधूओ की एक बैठक आयोजित की गई, आए हुए सभी ब्राह्मण बंधूओ का स्वागत मीनल कुमारी बबीता कुमारी और काजोल कुमारी ने तिलक लगाकर किया स्वागत के दौरान काजोल कुमारी ने कहा की स्वर्ग में ब्रह्मा और पृथ्वी पर ब्राह्मण देवता तुल्य हैं और यह हमेशा पूजनीय है I बैठक का प्रारंभ गायत्री मंत्र के पाठ से किया गया, बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर उपस्थित ब्राह्मणो ने अपने-अपने विचार रखें, सर्वप्रथम बैठक में सर्वसहमति से यह निर्णय लिया गया कि ब्राह्मण समाज संघ के द्वारा गौ गंगा गायत्री गुरू और ज्ञान से संबंधित कार्य को किया जाए और वैसे ब्राह्मण जो पथभ्रष्ट हो गए हैं या अपने धर्म करम से किसी कारणवश विमुक्त हो रहे हैं उनको वापस धर्म और कर्म की मुख्य धारा से जोड़ा जाए, ब्राह्मण समाज संघ के संस्थापक जयप्रकाश जोशी ने कहा कि स्वर्णों मे एक जाति आती है ब्राह्मण, जिस पर सदियों से राक्षस दैतय यवन मुगल अंग्रेज राजनीति पार्टी आक्रमण करते आ रहे हैं, जबकी *ब्राह्मणों ने समाज को और राष्ट्र को कई तरह के शास्त्र और शस्त्र उपलब्ध करवाए हैं जैसे:- यंत्रसर्वस्वम् (इंजीनियरिंग का आदि ग्रन्थ)-भरद्वाज, वैमानिक शास्त्रम् (विमान बनाने हेतु)-भरद्वाज, सुश्रुतसंहिता (सर्जरी चिकित्सा)-सुश्रुत, चरकसंहिता (चिकित्सा) -चरक, अर्थशास्त्र(जिसमें सैन्यविज्ञान, राजनीति, युद्धनीति, दण्डविधान, कानून आदि कई महत्वपूर्ण विषय हैं)- कौटिल्य, आर्यभटीयम् (गणित)- आर्यभट्ट।_ ऐसे ही छन्दशास्त्र, नाट्यशास्त्र, शब्दानुशासन, परमाणुवाद, खगोल विज्ञान, योगविज्ञान सहित प्रकृति और मानव कल्याणार्थ समस्त विद्याओं का संचय अनुसंधान एवं प्रयोग हेतु ब्राह्मणों ने अपना पूरा जीवन भयानक जंगलों में, घोर दरिद्रता में बिताए। उसके पास दुनियाँ के प्रपंच हेतु समय ही कहाँ शेष था? कोई बताएगा समस्त विद्याओं में प्रवीण होते हुए भी, सर्वशक्तिमान् होते हुए भी ब्राह्मण ने पृथ्वी का भोग करने हेतु गद्दी स्वीकारा हो…? विदेशी मानसिकता से ग्रसित कमनिष्ठों (वामपंथियों) ने कुचक्र रचकर गलत तथ्य पेश किए ।आजादी के बाद इतिहास संरचना इनके हाथों सौपी गई और ये विदेश संचालित षड़यन्त्रों के तहत देश में जहर बोने लगे। ब्राह्मण हमेशा से यही चाहता रहा है कि हमारा राष्ट्र शक्तिशाली हो अखण्ड हो, न्याय व्यवस्था सुदृढ़ हो। *सर्वे भवन्तु सुखिन:सर्वे सन्तु निरामया: सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दु:ख भाग्भवेत्।* का मन्त्र देने वाला ब्राह्मण, वसुधैव कुटुम्बकम् का पालन करने वाला ब्राह्मण सर्वदा काँधे पर जनेऊ कमर में लंगोटी बाँधे एक गठरी में लेखनी, पंचांग, पत्ते, कागज, और पुस्तक लिए चरैवेति-चरैवेति का अनुशरण करता रहा। मन में एक ही भाव था लोक कल्याण! ऐसा नहीं कि लोक कल्याण हेतु मात्र ब्राह्मणों ने ही काम किया। बहुत सारे ऋषि, मुनि, विद्वान्, महापुरुष अन्य वर्णों के भी हुए जिनका महत् योगदान रहा है, आज ब्राह्मणों को फिर से अपने खोई हुई गरिमा को वापस प्राप्त करना है जिसके लिए हम सबको मिलकर प्रयास करना है, वही होम्योपैथिक चिकित्सक ब्राह्मण डॉक्टर विप्लव प्रसाद चौधरी ने कहा कि आज जिस देश की शक्ति के संचार में ब्राह्मणों के त्याग तपस्या का इतना बड़ा योगदान रहा। जिसने मुगलों यवनों, अंग्रेजों और राक्षसी प्रवृत्ति के लोंगों का भयानक अत्याचार सहकर भी यहाँ की संस्कृति और ज्ञान को बचाए रखा। वेदों, शास्त्रों को जब जलाया जा रहा था तब ब्राह्मणों ने पूरा का पूरा वेद और शास्त्र कण्ठस्थ करके बचा लिया और आज भी वे इसे नई पीढ़ी में संचारित कर रहे हैं वे सामान्य कैसे हो सकते हैं..? उन्हें सामान्य जाति का कहकर आरक्षण के नाम पर सभी सरकारी सुविधाओं से रहित क्यों रखा जाता है? वही ब्राह्मण समाज संघ के संस्थापक कन्हैया खंडेलवाल ने कहा कि ब्राह्मण अपनी रोजी रोटी कैसे चलाए जबकी ब्राह्मण को देना पड़ता है:- पढ़ाई के लिए सबसे ज्यादा फीस, काम्प्टीशन के लिए सबसे ज्यादा फीस, नौकरी मांगने के लिए लिए सबसे ज्यादा फीस, और सरकार की सारी सुविधाएँ अन्य वर्ग या अल्पसंख्यक के नाम पर पूँजीपति या गरीब के नाम पर अयोग्य लोंगों को दी जाती हैं, इस देश में गरीबी से नहीं जातियों से लड़ा जाता है। एक ब्राह्मण के लिए सरकार कोई रोजगार नही देती कोई सुविधा नही देती। एक ब्राह्मण बहुत सारे व्यवसाय नहीं कर सकता जैसेः- पोल्ट्रीफार्म, अण्डा, मांस, मुर्गीपालन, कबूतर पालन, बकरी, गदहा, ऊँट, सुअरपालन, मछलीपालन, जूता, चप्पल, शराब आदि, बैण्डबाजा और विभिन्न जातियों के पैतृक व्यवसाय, क्योंकि उसका धर्म एवं समाज दोनों ही इसकी अनुमति नही देते! ऐसा करने वालों से उनके समाज के लोग सम्बन्ध नहीं बनाते व निकृष्ट कर्म समझते हैं। वो शारीरिक परिश्रम करके अपना पेट पालना चाहे तो उसे मजदूरी नही मिलती। क्योंकि लोग ब्राह्मण से सेवा कराना पाप समझते है। हाँ उसे अपना घर छोड़कर दूर मजदूरी, दरवानी आदि करने के लिए जाना पड़ता है। आज वर्तमान में ही देखा जाए तो कहलगांव के कूछ व्यावसायिक वर्ग मारवाड़ी समाज एवं अन्य घनाघय लोग भी ब्राह्मण वर्गों की उपेक्षा करते नजर आते हैं देखा जाए तो अभी वर्तमान में रक्षाबंधन के समय ब्राह्मण वर्ग आशीर्वाद देने के लिए व्यवसायीक वर्ग एवं मारवाड़ी समाज के घरों में जाकर रक्षा सूत्र बांधते हुए आशीर्वाद देते थे और कहते थे *दीनबंधु बलि राजा दानवेंद्रो महाबल: दानवेंद्रो मां चल मां चल* का मंत्र जाप करते हुए रक्षा सूत्र बांधते थे और बदले में दांत दक्षिण प्राप्त करते थे, जो की अब कुछ व्यापारी वर्ग एवं मारवाड़ी समाज द्वारा ब्राह्मणों और गायों की उपेक्षा करने के कारण हिंदुओं के धर्म का यह कर्म जो वैदिक काल से करते आ रहे थे वर्तमान में उसे खत्म हुआ देखकर काफी आहत है, वही ब्राह्मण पुजारी अगर मंदिर में सेवायत रहकर कार्य करता है या यजमानों तथा व्यापारी वर्ग आदि की आवश्यकता से संबंधित धार्मिक अनुष्ठानों का कार्य पूरा करता है तो ज्यादातर पुजारी को उचित मजदूरी में नहीं मिलती अब सवाल उठता है ऐसा क्यों हो रहा है जिसने संसार के लिए रात दिन इतनी कठिन तपस्या की उसके साथ इतना बड़ा अन्याय क्यों जिसने शिक्षा को बचाने के लिए सर्वसव त्याग दिया उसके साथ इतनी भयानक अत्याचार क्यों अतः हम सभी लोग ब्राह्मण है हमें किसी भी जाति विशेष से द्वेष नहीं है हमने शास्त्रों को जीने का प्रयास किया है धर्म के रासते पर जीने का मार्ग प्रशस्त किया है अतः हमारे सनातन धर्म संबंधी परंपरा व संस्कृति की रक्षा करने पर व पूजा पद्धति के कार्यों को करने के बाद भी उचित मेहनताना प्राप्त न होने के कारण हमारा उपहार होता है हम कब तक इस उपहास को बर्दाश्त करेंगे, विश्व की सबसे समृद्ध और एकमात्र वैज्ञानिक भाषा संस्कृत को हम ब्राह्मण पुजारी ने ही अब तक बचा कर रखा है फिर भी हमें हेय दृष्टि से क्यों देखा जाता है आखिर अन्य जाति के लोग धर्म के कार्यों से क्यों विमुख होते जा रहे हैं जबकि धर्म की नींव ही धार्मिक कार्यों पूजा अनुष्ठानों गौ गंगा गायत्री गुरु आदि वगैरह से हैं, इसलिए कहलगांव में ब्राह्मण समुदाय की एकता की फौज तैयार हो और आत्मनिर्भर स्वावलंबन बनकर धार्मिक क्रियाकलाप पर से भटकने वाले ब्राह्मण बंधूओ के साथ-साथ अन्य जातियों को भी धर्म के मार्गों पर वापस लाया जाए क्योंकि धर्म बचेगा तभी राष्ट्र बचेगा राष्ट्र बचेगा तो हमसब बचेंगे. कन्हैया खंडेलवाल ने यह भी कहा कि ब्राह्मण समाज के माता बहनों को कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाते हुए आर्थिक मदद देकर सवरोजगार के लिए प्रेरित किया जाएगा । साथ ही पुरानी बाजार स्थित महाप्रभु जगन्नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी श्री संजय झा ने कहा कि इस भागीरथी प्रयास के बहती गंगा तट पर स्थित गुप्तकाशी कहलगांव के धरा पर ब्राह्मणों की यह बैठक मिल का पत्थर साबित होगी और इसका लाभ कहलगांव क्षेत्र के साथ-साथ है संपूर्ण जनमानस को प्राप्त होगा पुजारी संजय झाजी ने कहलगांव शहर में संस्कृत विद्यालय, वैदिक अनुष्ठान कार्यक्रम को बढ़-चढ़कर करने के लिए सभी को प्रेरित किया ताकि धार्मिक कार्य के परंपरा से वंचित लोग अपने धर्म और कर्म के कार्यों से जुड़ सके. ब्राह्मण बंधु अधिवक्ता सचिन मिश्रा ने कहा कि वर्तमान समुदाय के किसी भी माता बहन भाइयों को कानूनी लिगल सलाह मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएगी और उनके संबंधित कार्य की बंधूभावना के साथ किया जाएगा। बैठक में कहलगांव ब्राह्मण समाज से पुरुषोत्तम कुमार जोशी गोपाल केदारनाथ जोशी श्याम जोशी सचिन मिश्रा जयप्रकाश जोशी पशुपतिनाथ जोशी श्याम सुंदर शर्मा पवन शर्मा दीपक शर्मा विप्लव कुमार चौधरी गौतम जोशी जितेंद्र कुमार मिश्रा गोविंद कुमार शर्मा पंडित संजय झा टूना मिश्रा सहित दर्जनों ब्राह्मण महानुभाव बंधु उपस्थित हुए। हाईवे सभी ब्राह्मण बांधूओ का पशुपतिनाथ जोशी श्याम सुंदर जोशी पवन शर्मा ने सभी का धन्यवाद किया।

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