Saturday 25 May 2024 11:55 PM
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राधाकृष्ण ठाकुरबाडी में धूमधाम से बना जन्माष्टमी का पर्व

राधाकृष्ण ठाकुरबाडी में धूमधाम से बना जन्माष्टमी का पर्व

राधाकृष्ण ठाकुरबाडी में धूमधाम से बना जन्माष्टमी का पर्व

कहलगांव से शैलेंद्र कुमार गुप्ता की रिपोर्ट
राधाकृष्ण ठाकुरवाड़ी कहलगाँव में धूमधाम से मनाया गया श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का त्योहार । शहर के चौधरी टोला स्थित प्राचीन राधाकृष्ण ठाकुरवाड़ी में आज से धूमधाम से मनाया गया श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का त्योहार मनाया गया। इस मंदिर परिसर को भव्य तरीके से सजाया गया था और नियमित विधि विधान से पूजा भोग के उपरांत भजन संध्या का अयोजन किया जा रहा था जो मध्य रात्रि को जन्मोत्सव और आरती के उपरांत समाप्त हो गया । मन्दिर के प्रबंधक सह सेवायत पण्डित बाल कृष्ण पांडेय ने बताया की आज विधिवत पूजा भोग के उपरांत भगवान राधाकृष्ण जी के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल जी की विधिवत पूजा अर्चना के उपरांत कार्यक्रम को अयोजित किया गया और भंडारे का भी अयोजन किया गया। जन्माष्टमी में अयोजित भजन कीर्तन जिसमे चंदननाथ चौधरी, अर्पित झा, रंजन झा ,संतोष कुमार, श्याम बिहारी टिबड़ेवाल , आदि ने अपने भजन से प्रभु को रिझाया । इस अवसर पर नित्य की भांति श्री पवन कुमार खेतान, राकेश गुप्ता, केशव जोशी,मुरारी खेतान, डा विजय कुमार, डा संतोष कुमार, श्यामबिहारी टिवरेवाल, शोभा पांडेय, अमिता कुमारी, पुष्पा चौधरी, मनीष पांडेय, विनीता चौधरी के साथ साथ नगर पंचायत की कार्यपालक पदाधिकारी सोनी कुमारी और अनेक भक्त उपस्थित थे । मन्दिर के प्रबन्धक श्री बाल कृष्ण पांडेय ने बताया की आधुनिकता के इस दौर में प्रायः जन्मोत्सव तो अब खत्म ही हो गया है और यह बड़े फैशन का रूप ले रहा हैं । श्रीकृष्ण जी भगवान विष्णु जी के अवतार हैं, जो तीनों लोकों के तीन गुणों सतगुण, रजगुण तथा तमोगुण में से सतगुण विभाग के प्रभारी हैं। भगवान का अवतार होने के कारण से श्रीकृष्ण जी में जन्म से ही सिद्धियां उपस्थित थी। उनके माता पिता वसुदेव और देवकी जी के विवाह के समय मामा कंस जब अपनी बहन देवकी को ससुराल पहुँचाने जा रहा था तभी आकाशवाणी हुई थी जिसमें बताया गया था कि देवकी का आठवां पुत्र कंस का अन्त करेगा। अर्थात् यह होना पहले से ही निश्चित था अतः वसुदेव और देवकी को कारागार में रखने पर भी कंस कृष्ण जी को नहीं समाप्त कर पाया। मथुरा के बंदीगृह में जन्म के तुरंत उपरान्त, उनके पिता वसुदेव आनकदुन्दुभि कृष्ण को यमुना पार ले जाते हैं, जिससे बाल श्रीकृष्ण को गोकुल में नन्द और यशोदा को दिया जा सके।
जन्माष्टमी पर्व लोगों द्वारा उपवास रखकर, कृष्ण प्रेम के भक्ति गीत गाकर और रात्रि में जागरण करके मनाई जाती है। मध्यरात्रि के जन्म के उपरान्त, शिशु कृष्ण की मूर्तियों को धोया और पहनाया जाता है, फिर एक पालने में रखा जाता है। फिर भक्त भोजन और मिठाई बांटकर अपना उपवास पूरा करते हैं। महिलाएं अपने घर के द्वार और रसोई के बाहर छोटे-छोटे पैरों के चिन्ह बनाती हैं जो अपने घर की ओर चलते हुए, अपने घरों में श्रीकृष्ण जी के आने का प्रतीक माना जाता है।
समारोह कहलगांव के इक्का दुक्का मन्दिर को छोड़कर अब तो जन्मोत्सव मानता भी नही है । यही एकमात्र मन्दिर है जो धरीक्षण महराज की ठाकुरवाड़ी के नाम से जानी जाती है में अब तक यह अयोजन करता आ रहा हैं । उन्होंने जन्माष्टमी के अवसर पर सभी भक्तो के उज्ज्वल भविष्य, सुख समृद्धि की कामना करते हुए कहा कि आप सभी जहां भी रहते हो नित्य न सही पर सप्ताह में एक दिन मौका निकाल कर आस पास स्थित मंदिर में जाए और प्रभु का दर्शन करें । इस अवसर पर मंदिर में आए व्रतियों के लिए फलाहार की भी व्यवस्था थी।

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