Thursday 23 May 2024 9:19 AM
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सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन : भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं की हुई चर्चा

सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन : भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं की हुई चर्चा

सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन : भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं की हुई चर्चा

स्वामी आत्मानंद जी महाराज ने जन्माष्टमी के प्रसंग को सुनाया

भागलपुर बिहार

जिला अंतर्गत नवगछिया के सैदपुर दुर्गा मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन गुरुवार को काफी संख्या में लोग पहुंचे। श्री रामचंद्राचार्य परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज ने जन्माष्टमी के कई प्रसंगों को सुनाया। इस मौके पर उनके प्रसंग में भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं की चर्चा हुई। माखन चोरी और गोपियों के साथ हास्य-विनोद की कथा सुनकर सभी भावविभोर हो गए। स्वामी आगमानंद जी ने कहा कि मानवता की रक्षा के लिए उन्होंने अवतार लिया था। वे भगवान विष्णु के अवतार थे। उन्होंने लोगों को यह कर्तव्य की शिक्षा दी। इस दौरान स्वामी आगमानंद जी ने कई भजन, आरती गाकर सभी को भगवान की

लीलाओं से ओतप्रोत कर दिया। कथा के दौरान स्वामी आगमानंद जी ने सनातन धर्म के लिए सभी को समर्पित होने का आह्वान किया। कहा कि जैन मत हिंदू धर्म की एक शाखा है। साथ ही उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि पॉलिथिन काफी नुकसानदाय है। सरकार और प्रशासन भी पॉलिथिन पर रोक

लगाना चाहती है, लेकिन पुलिस पॉलिथिन में सब्जी बेचने वालों को तो पकड़ती है, लेकिन पॉलिथिन फैक्ट्री को बंद नहीं करती। यह व्यवस्था ही चिंतनीय है। उन्होंने कहा कि हिंदू देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का गंगा में विसर्जित करने पर रोक है, जबकि नाले का पानी गंगा में प्रवाहित हो रही है। प्रतिमाओं का

निर्माण मिट्टी, पुआल और लकड़ी से होता है, जो गंगा में प्रवाहित होने के बाद जल को हानि नहीं पहुंचाता। उन्होंने कहा कि बिहार में तो कई और भी चीजें हैं, जो प्रतिबंधित है, खरीद-बिक्री और पीने पर रोक है, इसके बावजूद इसकी हकीकत से सभी परिचित हैं। भागवत कथा के दौरान कुंदन बाबा, मनोरंजन प्रसाद सिंह, पंडित प्रेम शंकर भारती, शिव प्रेमानंद भाय जी, स्वामी मानवानंद जी, रामबालक भाई, पंडित कौशल बाबा, मुकेश शास्त्री, पंडित चंद्रकांत झा, कपिस जी, उत्तम जी, श्वेत कमल आदि वहां मौजूद थे। दूसरी तरफ, श्री शिवशक्ति योगपीठ नवगछिया में भी भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव काफी धूम-धाम से मनाया गया। स्वामी आगमानंद जी ने वहां पहुंचकर भगवान की पूजा अर्चना की।

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