Monday 20 May 2024 2:36 AM
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राष्ट्रीय सेवा योजना, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय भागलपुर एवं विवेकानंद केंद्र

राष्ट्रीय सेवा योजना, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय भागलपुर एवं विवेकानंद केंद्र

राष्ट्रीय सेवा योजना, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय भागलपुर एवं विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी ,भागलपुर शाखा के संयुक्त तत्वाधान में आज दिनांक 19 सितंबर 2023 को स्वामी विवेकानंद द्वारा 19 सितंबर 1893 को शिकागो सर्वधर्म सम्मेलन में दिए गए संभाषण की स्मृति के रूप में विश्व बंधुत्व विमर्श का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विश्व बंधुत्व के संदर्भ में चरित्रवान युवाओं की भूमिका विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया । इस कार्यक्रम में सर्वप्रथम म कुलपति महोदय कलानुशासक महोदय , संकायाध्यक्ष छात्र कल्याण, महाविद्यालय निरीक्षक, कार्यक्रम समन्वयक तथा विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी से आए प्रांत प्रमुख विजय वर्मा जी एवं राज भूषण प्रसाद जी तथा देव ज्योति मुखर्जी जी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद इसके बाद कार्यक्रम समन्वयक डॉ राहुल कुमार ने अतिथियों का अंग वस्त्र पौधा तथा पुष्प देकर स्वागत किया एवं स्वागत भाषण करते हुए डॉक्टर राहुल कुमार ने कहा कि वे सौभाग्यशाली हैं कि जिनके दर्शन से राष्ट्रीय सेवा योजना नोट मी बट यू के सिद्धांत पर कार्य कर रहा है उन्हें महापुरुष के विमर्श स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम को करने का श्रेय नस के कार्यक्रम समन्वय के रूप में उन्हें प्राप्त हुआ है। तत्पश्चात विवेकानंद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई इस अवसर पर सर्वप्रथम बोलते हुए संकाय अध्यक्ष छात्र कल्याण प्रो .विजेंद्र कुमार ने कहा कि भारत अतीत वर्तमान और भविष्य तीनों ही कालों में विश्व का नेतृत्व करने में सक्षम रहा है और कोरोना काल में भारत ने साबित किया कि भारत की बंधुत्व भावना स्वार्थ से प्रेरित नहीं बल्कि भातृत्व से प्रेरित है। इसी प्रकार कुलानुशासन महोदय प्रो एस डी झा ने कहा कि नैतिकता धर्म और विश्वास के साथ मानव को केंद्र में रखकर किया गया विकास ही बंधुत्व मार्ग है। जबकि इस अवसर पर बोलते हुए कुलसचिव महोदय ने कहा कि मुझे इस बात से आपत्ति है कि भारत को सोने की चिड़िया क्यों कहा जाता है ,भारत को सोने का शेर कहा जाना चाहिए क्योंकि अब वह दिन नहीं है जब भारत को एक गुलाम देश के रूप में या थर्ड वर्ल्ड के रूप में देखा जाता था अब भारत विश्व का नेतृत्व कर रहा है। इस अवसर पर बोलते हुए महाविद्यालय निरीक्षक संजय झा सर ने कहा कि भारत का लोकतंत्र अपने आप में बंधुत्व और विचारधाराओं का संगम है भारतीय विविधता में एकता भारतीय बंधुत्व और वैश्विक एकत्र को स्थापित करने का मार्ग है। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए विजय वर्मा जी ने विस्तार से स्वामी विवेकानंद जी द्वारा 1893 में शिकागो धर्म सम्मेलन में दिए गए संभाषण को याद करते हुए विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से विश्व बंधुत्व के अर्थ को समझाया और युवा चरित्रवान किस प्रकार बने उसके लिए प्रेरित किया, जबकि देव ज्योति मुखर्जी ने युवाओं को विभिन्न पांच चरणों के माध्यम से अपने सोच ,विचार, और कर्म के साथ-साथ स्वभाव में चरित्र को उतारने के लिए मंत्र दिए । इस अवसर पर अध्यक्षीय उद्बोधन करते हुए माननीय कुलपति महोदय ने विस्तार पूर्वक स्वामी विवेकानंद जी के दर्शन, उनका गरीबों के प्रति दृष्टिकोण ,दरिद्र नारायण की अवधारणा ,देश के सर्वांगीण विकास ,देश में महिलाओं के सम्मान, देश में युवाओं की भागीदारी जैसे विषयों को समझाया। माननीय कुलपति महोदय ने कहा की 1893 में स्वामी विवेकानंद जी द्वारा दिया गया शब्द सिस्टरस एंड ब्रदरस ऑफ अमेरिका के संभाषण से लेकर G20 के वन अर्थ,वन फ्यूचर ,वन फैमिली के मंत्र को अगर देखा जाए तो भारत ने लगातार विश्व को बंधुत्व का ही संदेश दिया है । वसुधऐव कुटुंबकम की अवधारणा ,अतिथि देवो भव की अवधारणा विश्व योग दिवस आदि भारत का विश्व को बंधुत्व के प्रति सीख है। इस अवसर पर हुए कार्यक्रम में मंच संचालन का कार्य विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के नगर संचालक डॉक्टर मिहिर मोहन मिश्रा ने किया तो वहीं कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन का कार्य मारवाड़ी महाविद्यालय के कार्यक्रम पदाधिकारी संजय जायसवाल ने किया इस अवसर पर भागलपुर विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा से जुड़े हुए विभिन्न पदाधिकारी जिसमें डॉक्टर राजभूषण प्रसाद आदित्य सूरज खुशी शामिल थे इसी प्रकार इस कार्यक्रम को सफल बनाने में राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यालय के कर्मियों को के सहयोग प्रदान करने में शुभम कुमार, आर्यन कुमार, दिवाकर कुमार, चंदन कुमार सांभवी आदि ने योगदान दिया।

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